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Ek Tha Daaku

Ek Tha Daaku

Author: Niraj Sharma

Book Cost

Original price was: ₹249.Current price is: ₹199.

Short Description

एक था डाकू एक रोमांचक और भावनात्मक उपन्यास है जो दौलतपुर नामक एक रियासत में घटित घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। अरुण जब ज़मीन बेचने के लिए अपने पुश्तैनी गाँव लौटता है, तो वह अतीत की उन गलियों में पहुँच जाता है जहाँ सच दफ़न थे। ज़मींदारों का दबदबा, सत्ता की हवस, पारिवारिक कलह, प्रेम और विश्वासघात जैसे तत्वों को उपन्यास में बखूबी पिरोया गया है। लेखक नीरज शर्मा ने.....

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Original price was: ₹249.Current price is: ₹199.

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Page Count

72

Book Type

Paperback

ISBN

978-93-6402-570-6

Mrp

249

Genre

Novel

Language

Hindi

About the Book

एक था डाकू एक रोमांचक और भावनात्मक उपन्यास है जो दौलतपुर नामक एक रियासत में घटित घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। अरुण जब ज़मीन बेचने के लिए अपने पुश्तैनी गाँव लौटता है, तो वह अतीत की उन गलियों में पहुँच जाता है जहाँ सच दफ़न थे। ज़मींदारों का दबदबा, सत्ता की हवस, पारिवारिक कलह, प्रेम और विश्वासघात जैसे तत्वों को उपन्यास में बखूबी पिरोया गया है। लेखक नीरज शर्मा ने ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक संघर्षों को गहराई से प्रस्तुत किया है। यह सिर्फ़ ज़मीन या दौलत की लड़ाई नहीं, बल्कि आत्मा और उसूलों की लड़ाई भी है। जैसे-जैसे उपन्यास आगे बढ़ता है, एक के बाद एक राज़ खुलते जाते हैं, जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। यह उपन्यास हमें याद दिलाता है कि अतीत चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कभी-कभी वह वर्तमान पर भारी पड़ जाता है और बदलाव की जड़ें वहीं से पनपती हैं।

About the Author

“नीरज शर्मा, बिहार के समस्तीपुर जिले के एक छोटे से गाँव पकाही से हैं। ये मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। और वर्तमान में वे केमिस्ट्री विषय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने मात्र 14 वर्ष की उम्र में लेखन की शुरुआत की थी। आज, 19 वर्ष की उम्र में, वे न केवल लगातार लिख रहे हैं, बल्कि अपने विचारों, भावनाओं और कल्पनाओं को कागज़ पर उतार कर समाज से संवाद भी कर रहे हैं। नीरज खुद को किसी “बड़े लेखक” की उपाधि में नहीं बाँधते। उनके लिए लेखन एक आत्म-अभिव्यक्ति है। उनका मानना है कि कहानियाँ दिल से निकलती हैं और दिल तक पहुंचती हैं, फिर चाहे वह कलम किसी अनुभवी की हो या एक युवा मन की। उनकी पहला प्रकाशित उपन्यास “”एक था डाकू”” समाज, अपराध और मानवीय द्वंद्व को दर्शाती है। लेखन उनके लिए केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि सच की तलाश है — जिसे वे पूरी ईमानदारी से कागज़ पर उतारते हैं। नीरज यह मानते हैं कि हर रचना में पूर्णता नहीं होती, लेकिन हर गलती में एक सीख जरूर छुपी होती है। हमारे जीवन में हर कार्य के लिए एक सही समय होता है। जब वह समय आता है, तो साधारण काम भी असाधारण बन जाते हैं।”” बस ज़रूरत है — विश्वास बनाए रखने की। इसी सोच को दर्शाती उनकी डायरी से एक कविता, जो इस पुस्तक में विशेष रूप से सम्मिलित की गई है: “

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