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बिन पर परिंदे

मिट्ठू राम मंडल

मिट्ठू राम ‘मंडल’ एक सफल, समर्पित और प्रेरणादायी शिक्षक होने के साथ-साथ एक चिंतक, अभिप्रेरक और लेखन कार्य में रुचि रखते हैं। शिक्षा उनके लिए अध्ययन या अध्यापन तक सीमित नही है बल्कि व्यक्तित्व और समाज निर्माण का सशक्त माध्यम है। वे शुरू से अपने कार्य क्षेत्र में पूर्ण निष्ठा और लगन के साथ अपना योगदान दे रहे हैं। इन्होंने अब तक सैकड़ों छात्रों व अन्य लोगों के जीवन में प्रेरणा और जोश भरकर नयी बुलंदियों तक पहुंचने में मदद की है। इनके अनेकों छात्र आज देश- विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इनकी संवाद शैली सहज, संवेदनशील और प्रभाव शाली है। वे केवल ज्ञान का संप्रेषण ही नहीं करते बल्कि पाठकों के मन में आत्मविश्वास, धैर्य और उदेश्य बोध का संचार भी करते हैं। पठन-पाठन और जीवन के अनुभवों ने उनको यह काव्य संग्रह ‘बिन पर परिंदे’ लिखने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान में मिट्ठू राम ‘मंडल’ नयी पीढ़ी को सशक्त बनाने का कार्य कर रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि हर व्यक्ति के अंदर आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं मौजूद होती हैं। बस! ज़रूरत है सही समय पर उन्हें पहचानने की और उचित दिशा में मोड़ने की। यह पूरी उम्मीद है कि यह काव्य संग्रह पाठकों को अवश्य पसंद आयेगा तथा सही दिशा में कदम उठाने में मददगार साबित होगा।
 

लेखक परिचय

मिट्ठू राम ‘मंडल’ एक सफल, समर्पित और प्रेरणादायी शिक्षक होने के साथ-साथ एक चिंतक, अभिप्रेरक और लेखन कार्य में रुचि रखते हैं। शिक्षा उनके लिए अध्ययन या अध्यापन तक सीमित नही है बल्कि व्यक्तित्व और समाज निर्माण का सशक्त माध्यम है। वे शुरू से अपने कार्य क्षेत्र में पूर्ण निष्ठा और लगन के साथ अपना योगदान दे रहे हैं। इन्होंने अब तक सैकड़ों छात्रों व अन्य लोगों के जीवन में प्रेरणा और जोश भरकर नयी बुलंदियों तक पहुंचने में मदद की है। इनके अनेकों छात्र आज देश- विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इनकी संवाद शैली सहज, संवेदनशील और प्रभाव शाली है। वे केवल ज्ञान का संप्रेषण ही नहीं करते बल्कि पाठकों के मन में आत्मविश्वास, धैर्य और उदेश्य बोध का संचार भी करते हैं। पठन-पाठन और जीवन के अनुभवों ने उनको यह काव्य संग्रह ‘बिन पर परिंदे’ लिखने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान में मिट्ठू राम ‘मंडल’ नयी पीढ़ी को सशक्त बनाने का कार्य कर रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि हर व्यक्ति के अंदर आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं मौजूद होती हैं। बस! ज़रूरत है सही समय पर उन्हें पहचानने की और उचित दिशा में मोड़ने की। यह पूरी उम्मीद है कि यह काव्य संग्रह पाठकों को अवश्य पसंद आयेगा तथा सही दिशा में कदम उठाने में मददगार साबित होगा।
 
 
 

पुस्तक के बारे में

“बिन ‘पर’ परिंदे” कवि मिथू राम “मंडल” का पहला काव्य संग्रह है, जिसमें समाज के विविध पहलुओं को गहराई और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसमें जाितवाद, भेदभाव, शोषण, युद्ध, गरीबी और पाखंड जैसी समस्याओं पर प्रहार करते हुए आशा, समानता, महिला सशक्तिकरण, भाईचारा और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया गया है। कविताएँ सरल, सहज और आम बोलचाल की भाषा में हैं, जो हर आयु वर्ग के पाठकों से जुड़ाव महसूस कराती हैं। यह संग्रह केवल समस्याओं को उजागर नहीं करता बल्कि उनके समाधान और एक समतामूलक, शांतिपूर्ण समाज की कल्पना भी प्रस्तुत करता है

 

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