“आदमी और खरगोश” एक ऐसा संग्रह है जो प्रेम, विछोह, स्मृति और समय के गलियारों से होकर गुज़रता है। यह सिर्फ़ कविताएँ नहीं हैं —
ये वे क्षण हैं, जो जीते समय पूरी तरह कहे नहीं जा सके।
मनीष के. (जन्म: 1993) उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले से हैं । शिक्षा, साहित्य, भाषा और तकनीक में गहरी रुचि रखने वाले मनीष की रचनाएँ कई समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। “आदमी और खरगोश” उनका पहला कविता-संग्रह है — जो आदमी और उसकी अंतहीन भावनाओं/आशाओं का दस्तावेज़ है । ईमेल – kmanishsingh1@gmail.com
“आदमी और खरगोश” एक ऐसा संग्रह है जो प्रेम, विछोह, स्मृति और समय के गलियारों से होकर गुज़रता है। यह सिर्फ़ कविताएँ नहीं हैं —
ये वे क्षण हैं, जो जीते समय पूरी तरह कहे नहीं जा सके।
कभी यह संग्रह सन्नाटे-सा चीख़ता है,
तो कभी धीमे से वह सब कह देता है,
जो अनकहा रह गया।
यह विशुद्ध प्रेम का हस्ताक्षर है।
“आदमी और खरगोश” कोई उत्तर नहीं देता —
बस साथ चलता है
और यही इसकी ख़ूबसूरती है ।
Chat with us