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Ayogyatam Jeevita Ka Siddhant

Ayogyatam Jeevita Ka Siddhant

Author : Dr. Pradeep Mishra

Book Cost

199

Short Description

हमारे नेताजी को देखिए। व्‍हीआईपी होने के बावजूद क्‍या गजब का अनुशासन? वे भी कुंभ स्‍नान करने गए थे। सुरक्षाकर्मियों ने जिस कार में कहा, उसमें बिना नानुकुर बैठ गए। जहां कहा उतर गए। जिस जहाज में कहा, उस पर सवार हो गए। जब जहाज जमीन पर उतरा, तभी उससे उतरे। स्‍वागत में आए लोगों में से सिर्फ तीन के गुलदस्‍ते स्‍वीकार किए। रक्षकों ने चौथे की इजाजत नहीं दी थी। कैसा कठोर अनुशासन?

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199

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Page Count

118

Book Type

Paperback

ISBN

9789364028967

Mrp

199

Genre

Novel

Language

Hindi

About the Book

हमारे नेताजी को देखिए। व्‍हीआईपी होने के बावजूद क्‍या गजब का अनुशासन? वे भी कुंभ स्‍नान करने गए थे। सुरक्षाकर्मियों ने जिस कार में कहा, उसमें बिना नानुकुर बैठ गए। जहां कहा उतर गए। जिस जहाज में कहा, उस पर सवार हो गए। जब जहाज जमीन पर उतरा, तभी उससे उतरे। स्‍वागत में आए लोगों में से सिर्फ तीन के गुलदस्‍ते स्‍वीकार किए। रक्षकों ने चौथे की इजाजत नहीं दी थी। कैसा कठोर अनुशासन? साथ चल रहे डॉक्‍टरों का निर्देश मानते हुए, रेड कार्पेट पर अपने खुद के पैरों से दस कदम चले। मजाल क्‍या जो ग्‍यारहवां उठ जाता? इसके बाद हैलीकॉप्‍टर पर सवार हुए और लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। फिर उन्‍होंने जूस लिया। हैलीकॉफ्टर के रुकते ही सुरक्षाकर्मियों के घेरे में उतरे और उन्‍होंने जिस कार का दरवाजा खोला उसमें फिर से बैठ गए और जब कार का दरवाजा खुला तभी उतरे। ००० प्रभु ने दृढतापूर्वक कहा, ’नहीं, तू जापान में नहीं बल्कि ऐसे मुल्क में पैदा होगा, जहाँ तीन मिनट क्या, तीन घंटे, तीन दिन और तीन साल..की गैरहाजिरी भी अपराध नहीं मानी जाती। तेरी अनुपस्थिति में तुझे प्रमोशन मिलेगा। प्रतिष्ठा मिलेगी। सुख, समृद्धि और सत्‍ता प्राप्त होगी। तू यशवंत बनेगा…जा सीना ठोंककर आराम करते हुए अजगर की तरह नौकरी कर।’ कहकर प्रभु ने मुझे आर्यावर्त का परमानेंट डोमेसाइल दे दिया। ००० भीड़ नहाने भी जाती है। उसका मानना है कि नहाने से पाप धुल जाते हैं। मोक्ष भी मिलता है। मोक्ष, सबको नहीं मिलता, इसलिए ज्‍यादातर लोग अपने पैरों पर चलकर घर वापस आ जाते हैं। दरवाजे पर उनके मोक्ष और संपत्ति की कामना कर रहे लोग कहते हैं, ‘लो इस बार भी बाबूजी को मोक्ष नहीं मिला। अब और झेलो इन्‍हें अगले बारह साल तक।’ ०००

About the Author

शिक्षा…पीएच.डी. जन्म…१७/८/१९६० ००० प्रकाशन…. ००० बहुत सी पत्रपत्रिकाओं साप्ताहिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी, रविवार, शुक्रवार, सूरज, ब्लिट्ज, वसुधा, विश्‍वरंग संवाद, आज, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, द ट्रिब्यून, पत्रिका, देशबंधु, लोकमत, नई दुनिया, नवभारत, जनसंदेश, स्टार समाचार, बिजिनेस स्टेट, व्यापार किरण आदि बहुतायत में नियमित प्रकाशन। ००० १. एक संवेदनशील मामला (व्यंग्य नाटक) २. सर्वर डाउन है (व्यंग्य संग्रह) ३. लात के विरूद्ध इम्‍यूनिटी (व्यंग्य संग्रह) ४. बापू की स्मार्ट सिटी (व्यंग्य संग्रह) ५. कुछ रंग कुछ व्यंग्य (व्यंग्य संग्रह) ६. ईव्‍हीएम वशीकरण का ताबीज (व्यंग्य संग्रह) ७. लोकतांत्रिक ऊँट की करवट (व्यंग्य संग्रह) ००० पता: ‘अंबा’, डी1 रामविहार, राजेन्‍द्र नगर, सतना (म.प्र.) 485001 pmishra494@gmail.com फोन नंबर:09827063496

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