निधि तिवारी शिक्षा, साहित्य, भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं लोकसंस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय, समर्पित शिक्षिका, शोधार्थी एवं लेखिका हैं। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा क्षेत्र के सरकारी विद्यालय से हुई। उच्च शिक्षा के लिए आपने एफ.जी.एम. गवर्नमेंट कॉलेज, मंडी आदमपुर से स्नातक (बी.ए.) की उपाधि प्राप्त की।
इसके उपरान्त आपने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र से एम.ए. (हिंदी), एम.ए. (लोक प्रशासन) तथा बी.एड. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। मानवाधिकार के प्रति विशेष रुचि के कारण आपने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ह्यूमन राइट्स भी किया। इसके
अतिरिक्त आपने एम.ए. (कथक/नृत्य) की उपाधि प्राप्त की तथा वर्तमान में कथक विषय में पीएच.डी. का शोधकार्य कर रही हैं।
शिक्षण के क्षेत्र में भी आपका अनुभव उल्लेखनीय है। आपने सेंट पॉल कॉन्वेंट स्कूल, दसुआ में हिंदी शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। इसके पश्चात सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, जालंधर में नृत्य शिक्षिका के रूप में कार्य करते हुए विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय नृत्य एवं लोककलाओं के प्रति रुचि जागृत करने का सराहनीय कार्य कर रही हैं।
नृत्य के क्षेत्र में आपकी उपलब्धियाँ अत्यंत प्रेरणादायक हैं। आपने राज्य (State) एवं राष्ट्रीय (National) स्तर की अनेक नृत्य प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त किए हैं। इसके अतिरिक्त आपने विभिन्न यूथ फेस्टिवलों (Youth Festivals) में अपनी प्रतिभा का सफल प्रदर्शन किया तथा अनेक प्रतिष्ठित टैलेंट हंट प्रतियोगिताओं में विजेता बनकर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। आपकी इन उपलब्धियों ने आपको एक कुशल नृत्यांगना, प्रशिक्षिका एवं सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में प्रतिष्ठित किया है।
नृत्य, लोकसंस्कृति एवं शिक्षा के प्रति आपकी गहन रुचि ने आपको शोध एवं लेखन की दिशा में प्रेरित किया। हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से आपने “हरियाणवी लोकनृत्य की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि” पुस्तक का लेखन किया है। यह कृति हरियाणवी लोकनृत्यों के ऐतिहासिक विकास, सांस्कृतिक महत्व, सामाजिक संदर्भ, परंपराओं एवं कलात्मक स्वरूप का गहन अध्ययन प्रस्तुत करती है।
आपका उद्देश्य भारतीय लोक संस्कृति, शास्त्रीय नृत्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध, लेखन और शिक्षण के माध्यम से समाज एवं नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना है। आपकी यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों, कला-प्रेमियों तथा लोकसंस्कृति के अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी सिद्ध होगी। आपकी शैक्षणिक योग्यता, शोध-दृष्टि, मंचीय अनुभव तथा सांस्कृतिक प्रतिबद्धता इस कृति को विशेष विश्वसनीयता और गरिमा प्रदान करती है।