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मैं भी उतरा पार

सुरेश कुमार 'कल्याण'

“मैं भी उतरा पार” सरेश कुमार ‘कल्याण’ की एक अद्भुत दोहा सतसई है, जिसमें जीवन, समाज, प्रकृति, कर्म, देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं का गहरा संगम दिखाई देता है।
 

लेखक परिचय

सुरेश कुमार ‘कल्याण’ का जन्म 16 सितम्बर 1979 को हुआ। वे हरियाणा के कैथल जिले के रहने वाले एक प्रसिद्ध कवि, शिक्षक और साहित्यकार हैं। एम.ए. (हिंदी) व बी.एड. शिक्षित सुरेश कुमार वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, नरड़ (कैथल) में कार्यरत हैं। उनका पहला काव्य संकलन ‘पथरीले पथ पर’ प्रकाशित हो चुका है। उनकी रचनाएँ ‘दैनिक ट्रिब्यून’, ‘दीपमाला’ जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। वे अनेक साहित्यिक संस्थाओं के सक्रिय सदस्य हैं। कविता, कहानी, समीक्षा, लेखन और आलोचना में समान रूप से सक्रिय सुरेश कुमार ‘कल्याण’ हिंदी साहित्य जगत में एक सशक्त और संवेदनशील स्वर हैं।

 

पुस्तक के बारे में

“मैं भी उतरा पार” सरेश कुमार ‘कल्याण’ की एक अद्भुत दोहा सतसई है, जिसमें जीवन, समाज, प्रकृति, कर्म, देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं का गहरा संगम दिखाई देता है। यह कृति न केवल दोहा छंद की परंपरा को पुनर्जीवित करती है, बल्कि आधुनिक युग के मूल्यों, संघर्षों और आस्थाओं को भी अपनी पंक्तियों में समेटती है। लेखक ने शब्दों के माध्यम से जीवन की सच्चाइयों, राष्ट्रप्रेम, गुरु-भक्ति और प्रकृति के सौंदर्य को हृदयस्पर्शी रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक विचारों, संवेदनाओं और प्रेरणा का समृद्ध स्रोत है।
 

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