Aashiyana

Category

Author: Priyanka Jain

Book Cost

198

मेरा हमेशा से रहा है की घर मेरा आशियाने की तरह हो समुन्द्र के किनारे, जहाँ शाम को लहरों मे खड़े होकर नजारा लो, जिससे दिनभर की सारी थकान, टेंशन दूर हो जाए। मेरी इस किताब की सारी कहानियाँ इसी पर आधारित है।

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Page Count

47

Book Type

Paperback

ISBN

9788196743635

Mrp

199

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

मेरा हमेशा से रहा है की घर मेरा आशियाने की तरह हो समुन्द्र के किनारे, जहाँ शाम को लहरों मे खड़े होकर नजारा लो, जिससे दिनभर की सारी थकान, टेंशन दूर हो जाए। मेरी इस किताब की सारी कहानियाँ इसी पर आधारित है।मुझे शुरू से ही किताबे पढ़ने का शौंक रहा है, प्रेरणादायक कहानियाँ मुझे बहुत पसंद है। आशियाना नाम मुझे इसलिए सूझा, दुनियाँ में कितने ही बच्चे अपने मां बाप को घर से निकाल देते है, कई गरीब बच्चे दूसरे शहर में पढ़ने या नौकरी करने जाते हैं लेकिन रहने के लिए घर नहीं होते हैं घरों का किराया इतना होता है की वो देने मे असमर्थ होते हैं । इस आशियाना किताब में ऐसे ही कहानियों का जिक्र किया गया है कुछ तो मेरा आँखों देखा हाल है। मेरे किताब लिखने का श्रेय कहीं न कहीं करुण भईया का रहा है उन्होंने ही मुझे प्रोत्साहन दिया है की तुम लिख सकती हो पहले कुछ किताबें पढ़ने को कहा,फिर लिखने को। करुण भईया मेरे पापा के अच्छे दोस्त सूरज सक्सेना(अंकल) जी के बेटे है।

About the Author

मेरा नाम प्रियंका जैन है मैने एम. ए. किया है इकोनॉमिक्स से। मैं दतिया (एम. पी.) से हूँ।मेरी शादी इलाहाबाद में हुई है मेरे पति का नाम दीपांशु जैन है। मैं हाउस वाइफ हूँ मुझे लिखने का शौंक शुरू से रहा है कभी लिख नहीं पाई।अब लिखना शुरू किया है। मेरी पहली बुक ए-जिंदगी है।दूसरी बुक आशियाना है। मेरे मायके में मेरे पापा श्री सुरेश कुमार भटनागर मम्मी श्रीमती ममता भटनागर और भाई अनुभव भटनागर है।मेरे पापा हमेशा से मेरे आइडल रहे है। ससुराल में ससुर श्री दीप चंद जैन,सास श्रीमती संतोष जैन,पति श्री दीपांशु जैन,देवर श्री हिमांशु जैन,देवरानी श्रीमती दिव्या जैन और मेरा प्यारा सा भतीजा कुशाग्र जैन है जिसे प्यार से आदि कहते है।
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