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Andhere Ke Viruddh

Andhere Ke Viruddh

Author : Binod Kumar Naitik

Book Cost

Original price was: ₹259.Current price is: ₹249.

Short Description

कविता मेरे लिए केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज, समय और संवेदनाओं से उपजा वह स्वर है, जो भीतर उठती बेचैनी को अभिव्यक्ति देता है। जब भी मैंने अपने चारों ओर अन्याय, भेदभाव, पीड़ा, विडंबना, टूटते रिश्ते, बदलती मान्यताएँ और मौन चीखें देखीं, तब मन ने कलम का सहारा लिया। यही भाव आगे चलकर “अंधेरे के विरुद्ध” काव्य-संग्रह के रूप में आपके सामने उपस्थित है।

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Original price was: ₹259.Current price is: ₹249.

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Page Count

161

Book Type

Paperback

ISBN

9789364021074

Mrp

259

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

कविता मेरे लिए केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज, समय और संवेदनाओं से उपजा वह स्वर है, जो भीतर उठती बेचैनी को अभिव्यक्ति देता है। जब भी मैंने अपने चारों ओर अन्याय, भेदभाव, पीड़ा, विडंबना, टूटते रिश्ते, बदलती मान्यताएँ और मौन चीखें देखीं, तब मन ने कलम का सहारा लिया। यही भाव आगे चलकर “अंधेरे के विरुद्ध” काव्य-संग्रह के रूप में आपके सामने उपस्थित है। इस संग्रह का शीर्षक केवल बाहरी अंधकार का विरोध नहीं है, बल्कि उन सामाजिक, मानसिक और नैतिक अंधेरों के विरुद्ध एक सजग स्वर है, जो मानवता को भीतर से खोखला करते हैं। जातिवाद, लिंग-भेद, दहेज, बाल विवाह, भ्रष्टाचार, शोषण, नशा, साइबर अपराध, पर्यावरण संकट, संवेदनहीनता और रिश्तों में बढ़ती दूरी – ये सब उसी अंधकार के विभिन्न रूप हैं, जिन्हें पहचानना और चुनौती देना आज आवश्यक है। इन कविताओं में कहीं आक्रोश है, कहीं करुणा; कहीं प्रश्न है, कहीं चेतावनी; कहीं प्रेम है, कहीं आशा का दीपक। मैंने प्रयास किया है कि कविता केवल पढ़ी न जाए, बल्कि महसूस भी की जाए। यदि कोई पाठक इन रचनाओं को पढ़कर सोचने पर विवश हो, अपने भीतर झाँके, किसी पीड़ित के प्रति संवेदनशील बने, या समाज में सकारात्मक परिवर्तन की इच्छा जागे – तो मैं अपने लेखन को सार्थक मानूँगा। मैं मानता हूँ कि अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटी-सी रोशनी उसे चुनौती दे सकती है। यह संग्रह उसी रोशनी की तलाश है – और उस विश्वास का प्रमाण भी कि मनुष्य अभी पूरी तरह पराजित नहीं हुआ है। मैं अपने परिवार, शुभचिंतकों, मित्रों तथा उन सभी पाठकों का हृदय से आभारी हूँ, जिनके स्नेह, प्रेरणा और विश्वास ने मुझे लिखते रहने का साहस दिया। आशा है, “अंधेरे के विरुद्ध” आपकी संवेदनाओं को स्पर्श करेगा और मन में एक नई रोशनी जगाएगा। ~ बिनोद कुमार “नैतिक”

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