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Anurag

Anurag

Author : Dr. Reeta Saxena

Book Cost

Original price was: ₹199.Current price is: ₹189.

Short Description

‘अनुराग’ डॉ. रीता सक्सेना का एक संवेदनशील एवं विचारप्रधान काव्य-संग्रह है, जिसमें मानवीय जीवन, सामाजिक विसंगतियों, बदलते मूल्यों, संबंधों और आत्मचेतना के विविध पक्षों को अभिव्यक्ति मिली है। मूलतः 1995 में प्रकाशित यह संग्रह संशोधित एवं परिवर्धित द्वितीय संस्करण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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Original price was: ₹199.Current price is: ₹189.

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Page Count

113

Book Type

Paperback

ISBN

9789364023214

Mrp

199

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

‘अनुराग’ डॉ. रीता सक्सेना का एक संवेदनशील एवं विचारप्रधान काव्य-संग्रह है, जिसमें मानवीय जीवन, सामाजिक विसंगतियों, बदलते मूल्यों, संबंधों और आत्मचेतना के विविध पक्षों को अभिव्यक्ति मिली है। मूलतः 1995 में प्रकाशित यह संग्रह संशोधित एवं परिवर्धित द्वितीय संस्करण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कविताओं में आधुनिक जीवन की विडंबनाओं, बढ़ते अलगाव, सांस्कृतिक विखंडन, मानवीय संवेदनाओं के क्षरण और अस्तित्व के प्रश्नों के साथ-साथ प्रेम, आशा, प्रकृति, आत्मपहचान और जीवन-संघर्ष की अनुभूतियाँ भी उभरती हैं। सरल, आत्मीय और प्रभावपूर्ण भाषा के माध्यम से कवयित्री पाठक को अपने भीतर झाँकने तथा मानवीय मूल्यों, आत्मीयता और संवेदनशीलता को पुनः पहचानने के लिए प्रेरित करती हैं। यह संग्रह व्यक्तिगत अनुभूति और सामाजिक यथार्थ के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित करता है।

About the Author

डॉ. रीता सक्सेना नवगीत परम्परा की कवयित्री हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं समय-समय पर प्रकाशित होती रही है। “भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की पत्रिका,गगनांचल,”में भी इनकी रचनाएं छप चुकी हैं। “युग शून्य है”, “अनुराग”, “यादों के पखेरू”,”यथार्थ की धूप”, “यथार्थ का झरोखा”, “यथार्थ के ठौर” इनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं। इसमें विशेषतया ‘अनुराग’ को, सौभाग्यवश परमादरणीया महादेवी वर्मा जी का शुभाशीष प्राप्त हो चुका है। इतिहास, राजनीति शास्त्र और हिंदी तीन विषयों में परास्नातक हैं। ‘ललित निबंध’पर इन्होंने शोध कार्य किया है। आगरा आकाशवाणी से भी इनकी रचनाएं प्रसारित होती रही हैैं। वर्तमान में साहित्य सेवा में ही इनकी अभिरुचि है। ‘लाकडाॅउन ‘प्रथम से अब तक इनकी लगभग पैंतीस ‘एनथोलॉजी’ भी आ चुकी हैं, अभी भी कवयित्री सकारात्मक सृजन में जुटी हैं, उनकी लेखनी अभी विराम नहीं लेना चाहती हैं।

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