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Ashwatthama: Multiverse ka Mahakal

Ashwatthama: Multiverse ka Mahakal

Author : Bikki Singh Sengar

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Original price was: ₹249.Current price is: ₹239.

Short Description

एक साधारण जीवन जी रहा इंसान अचानक ऐसी शक्ति का वाहक बन जाता है, जो समय और मृत्यु के नियमों को तोड़ देती है। एक रहस्यमयी घटना उसके भीतर छुपे उस अस्तित्व को जगा देती है, जिसे सदियों से दुनिया ने केवल कथाओं में सुना था। अतीत की परछाइयाँ वर्तमान में लौटती हैं और भविष्य का विनाश उसकी आँखों के सामने आकार लेने लगता है।

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Original price was: ₹249.Current price is: ₹239.

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Page Count

155

Book Type

Paperback

ISBN

9789364028042

Mrp

249

Genre

Fiction

Language

Hindi

About the Book

एक साधारण जीवन जी रहा इंसान अचानक ऐसी शक्ति का वाहक बन जाता है, जो समय और मृत्यु के नियमों को तोड़ देती है। एक रहस्यमयी घटना उसके भीतर छुपे उस अस्तित्व को जगा देती है, जिसे सदियों से दुनिया ने केवल कथाओं में सुना था। अतीत की परछाइयाँ वर्तमान में लौटती हैं और भविष्य का विनाश उसकी आँखों के सामने आकार लेने लगता है। दोस्त, जो कभी साथ खड़े थे, अब बदल चुके हैं—कुछ हथियार बन गए हैं, कुछ रहस्य। विज्ञान और पौराणिक शक्तियों के बीच छिड़ी इस जंग में सच और धोखा एक-दूसरे में घुल जाते हैं। हर कदम पर एक नया रहस्य खुलता है, और हर उत्तर एक और भयावह सवाल बनकर सामने आता है। क्या वह अपनी इंसानियत बचा पाएगा, या महाकाल बनकर सब कुछ खत्म कर देगा? समय की दरारों में छुपी यह कहानी आपको उस दुनिया में ले जाएगी, जहाँ हर निर्णय का परिणाम विनाश हो सकता है, और हर मोड़ पर इंतज़ार कर रहा है—एक अनदेखा, अटूट अंधेरा

About the Author

बिक्की सिंह “सेंगर” एक प्रखर उपन्यासकार हैं, जो अपनी लेखनी से भविष्य के भारत और प्राचीन भारतीय पौराणिक इतिहास के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग) की वादियों में रचे-बसे बिक्की सिंह ने इयू (IGNOU) से इतिहास में स्रातक किया है। इतिहास के गहरे अध्ययन और भविष्य की वैज्ञानिक कल्पनाओं के मेल ने उन्हें इस ‘एपिक’ गाथा को रचने के लिए प्रेरित किया। पारिवारिक रूप से श्रीमती प्रेमा सिंह एवं श्री राम अवध सिंह के पुत्र, बिक्की सिंह का जन्म मध्यवर्गीय परिवार में 05 मार्च 1987 ईस्वी में हुआ ये अपनी माता पिता के सबसे बड़े संतान है, और पिछले 17 वर्षों से एग्रो-केमिकल कम्पनी में एक जिम्मेदार पद पर कार्यरत हैं। एक कठिन पेशेवर जीवन के साथ-साथ साहित्य के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का ही परिणाम है – “अश्वत्थामा सीरीज़”। “अश्वत्थामाः मल्टीवर्स का महाकाल” उनके उपन्यास जगत की पहली कड़ी है। एक उपन्यासकार के रूप में उनका उद्देश्य पाठकों को एक ऐसे रोमांचक सफर पर ले जाना है, जहाँ समय की सीमाएँ टूटती हैं और वीरता की नई परिभाषा लिखी जाती है।

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