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Cheekhti Khamoshiyan

Cheekhti Khamoshiyan

Author: Bobby Sodhi Deedar

Book Cost

Original price was: ₹249.Current price is: ₹199.

Short Description

सिर्फ कहानी नहीं,बल्कि हमारे समाज का वो आईना है जो ज़िंदगी की आपाधापी में कहीं धुँधला सा गया है और हम सब देख कर भी देख नहीं पा रहे हैं..!

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Original price was: ₹249.Current price is: ₹199.

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Page Count

115

Book Type

Paperback

ISBN

978-93-6402-704-5

Mrp

249

Genre

Short Stories

Language

Hindi

About the Book

चीख़ती ख़ामोशियाँ (थोड़ी हक़ीक़त थोड़ा फ़साना), सिर्फ कहानी नहीं,बल्कि हमारे समाज का वो आईना है जो ज़िंदगी की आपाधापी में कहीं धुँधला सा गया है और हम सब देख कर भी देख नहीं पा रहे हैं..! बस उसी को दर्शाने की कोशिश में इस किताब का जन्म हुआ है। यूँ तो हर इन्सान में कोई ना कोई दर्द, कोई ना कोई कहानी छिपी होती है। बस.. वो नज़र चाहिए, जो उस कहानी को पढ़ सके, उस दर्द को सुन सके, महसूस कर सके। कई बार वो दर्द लबों से बयान नहीं हो पाता है, लेकिन उस इन्सान की ख़ामोशी चीख़ चीख़ कर पुकारती है, वो ख़ामोशी बहुत कुछ कहना चाहती है, बताना चाहती है! एक लेखक के लिए कहानी लिखना आसान नहीं होता है। वो सिर्फ इसे लिखता ही नहीं है, बल्कि अपने पात्रों के साथ जीता भी है। जिस कहानी का जिस दिन से जन्म होता है, लेखक उन्ही किरदारों के साथ रातों को जागता है, वो उनसे बातें करता है।  उसकी कहानी के किरदार उसके साथ अपने भीतर का दर्द, प्यार, नफ़रत, वफ़ा, बेरुख़ी सब साझा करते हैं। उन किरदारों के आंसू लेखक की आँखों से बहते हैं, और वो ही उसकी कलम की स्याही बनते हैं। ये क़िरदार कहीं और नहीं हमारे ही आसपास होते हैं। पता नहीं मेरी कलम इनकी भावनाओं के साथ इंसाफ़ कर पाई है या नहीं! बस इतना मालूम है कि इनको लिखते-लिखते जितना इनके दर्द को एक इंसान होने के नाते मैंने महसूस किया है उतना बयान नहीं हो पाया है क्योंकि .., “चीख़ती ख़ामोशियाँ, सिर्फ कोरी कल्पना नहीं, थोड़ी हक़ीक़त थोड़ा फ़साना है।”

About the Author

बॉबी सोढी दीदार जी एक उभरती हुई संवेदनशील लेखिका हैं, इनका जन्म नज़ाकत-नफ़ासत और तहज़ीब के शहर लखनऊ में हुआ, बचपन से ही इन्हें कविताएं, कहानियाँ शेर-ओ-शायरी और लेख लिखने का शौक़ था। इनका पहला लेख, “आखिर क्यूं नारी पुरुषों के अधीन है?”, मात्र पंद्रह वर्ष की आयु में नवजीवन अख़बार में प्रकाशित हुआ था। इनके इस लेख को बहुत सराहना मिली। ये टेलीविजन पर भी एंकर के रूप में सक्रिय रह चुकी हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ में हुई, और ये समाजशास्त्र में परास्नातक हैं। ये विभिन्न काव्य प्रतियोगिताओं में निर्णायक रही हैं। इन्हें प्रकृति से बेहद लगाव है, और वर्तमान में ये नेशनल इंस्टीट्यूट आफ़ ओपन स्कूलिंग से नेचुरोपैथी और यौगिक साइंस से डिप्लोमा कोर्स कर रही है। “चीख़ती ख़ामोशियाँ”इनका पहला कहानी संग्रह है जिसमें नौ कहानियाँ हैं जिन्हें जीवन के नौ रंग कहना ग़लत नहीं होगा।

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