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Ek Fitoor

Ek Fitoor

Author: Rajendra Singh Jadon

Book Cost

Original price was: ₹249.Current price is: ₹229.

Short Description

“एक फ़ितूर” जादौन जी के भीतर के कवि और पत्रकार दोनों के अद्भुत संगम का परिणाम है। उनकी कविताएँ जहाँ पत्रकारिता की तेज़ नज़र रखती हैं, वहीं उनमें एक कवि की आत्मा की कोमलता भी विद्यमान है। शब्द उनके लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि अनुभव का विस्तार हैं।

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Original price was: ₹249.Current price is: ₹229.

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Page Count

132

Book Type

Paperback

ISBN

978-93-6402-447-1

Mrp

249

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

“एक फ़ितूर” : संवेदना, सत्य और समाज से संवाद करती कविताएँ साहित्य तभी जीवित रहता है जब वह अपने समय की गंध, पीड़ा और चेतना को समेटे। कवि राजेन्द्र सिंह जादौन का कविता-संकलन “एक फ़ितूर” इसी संवेदना का जीवंत उदाहरण है। यह पुस्तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि उन कटु सच्चाइयों की गवाही है जिनसे समाज रोज़ गुजरता है पर जिन पर बोलने का साहस बहुत कम लोग जुटा पाते हैं। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, विचारक और कलात्मक छायाकार राजेन्द्र सिंह जादौन ने अपने जीवन के अनुभवों को शब्दों में ढाला है। उन्होंने वर्षों तक पत्रकारिता के माध्यम से समाज की नब्ज़ को परखा और अब वही अनुभव कविताओं के रूप में सामने आए हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ भावुकता से नहीं, बल्कि यथार्थ की सच्ची जमीन से उपजी हैं। “एक फ़ितूर” उनके भीतर के उस बेचैन कवि की आवाज़ है जो सत्य से मुँह नहीं मोड़ता। इन कविताओं में संवेदना है, प्रतिरोध है, प्रेम की कोमलता है और व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य भी। जादौन की कविताएँ पाठक को भीतर तक झकझोरती हैं वे केवल पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। यह संग्रह इस बात का प्रमाण है कि कवि केवल सपनों में नहीं जीता, बल्कि उनके टूटने की आवाज़ भी सुनता है। जादौन के शब्द आग की तरह तपते हैं और करुणा की तरह पिघलते हैं। वे भूख की बात करते हैं, न्याय की तलाश में भटकते हैं और समाज की उदासियों को स्वर देते हैं। दरअसल, “एक फ़ितूर” कवि के भीतर की उस जागरूकता का प्रतीक है जो अन्याय, असमानता और दिखावे के विरुद्ध बोल उठती है। जादौन के लिए कविता साधना है आत्मसंवाद का माध्यम। उनकी सरल भाषा और गहरी संवेदना पाठक को सीधे हृदय तक छूती है। यह कृति हमें याद दिलाती है कि सच्चा साहित्य वही है जो समाज से संवाद करे। “एक फ़ितूर” उसी संवाद की मशाल है जो अंधेरे में भी शब्दों की रोशनी जगाए रखती है। यह कृति हमें याद दिलाती है कि सच्चा साहित्य वही है जो समाज से संवाद करे। “एक फ़ितूर” उसी संवाद की मशाल है — जो अंधेरे में भी शब्दों की रोशनी जगाए रखती है।

About the Author

राजेन्द्र सिंह जादौन मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और कलात्मक भूमि में जन्मे एक ऐसे रचनाकार हैं, जिनकी पहचान वरिष्ठ पत्रकार, व्यंग्यकार कवि और कलात्मक छायाकार के रूप में स्थापित है। उनकी रचनात्मक यात्रा पत्रकारिता से प्रारंभ होकर कविता और व्यंग्य तक फैली है। शब्दों के इस सफ़र में उन्होंने न केवल घटनाओं को दर्ज किया, बल्कि समाज की धड़कनों को भी सुना, महसूस किया और उन्हें अपनी विशिष्ट भाषा में व्यक्त किया। पत्रकारिता ने जादौन जी को सत्य की सूक्ष्म पहचान और समाज की नब्ज़ को समझने की दृष्टि दी। यही दृष्टि उनकी कविताओं और व्यंग्य में दिखाई देती है। उनके शब्द कभी कोमल संवेदनाओं से भरे होते हैं, तो कभी सामाजिक विडंबनाओं पर तीखा प्रहार करते हैं। वे बिना किसी भय या झिझक के समाज की विसंगतियों को उजागर करते हैं पर ऐसा करते समय उनका उद्देश्य आलोचना नहीं, बल्कि जागृति होता है। उनकी कविताओं में जीवन का अनुभव, समय की पीड़ा और मानवीय भावनाओं की गहराई सहजता से घुली हुई मिलती है। वे जीवन के हर रंग को अपनी कविता में स्थान देते हैं प्रेम, संवेदना, विद्रोह, व्यंग्य और करुणा सब कुछ एक लय में बहता है। जादौन जी की रचनाएँ केवल भावनाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का निमंत्रण हैं। पाठक जब उनकी कविता पढ़ता है, तो वह अपने भीतर झाँकने लगता है; कविता के पात्रों और स्थितियों में स्वयं को खोजने लगता है। उनकी लेखनी का सबसे बड़ा गुण है सरलता में गहराई। वे जटिल विचारों को इतने सहज शब्दों में पिरोते हैं कि वह सीधे हृदय में उतर जाते हैं। यही सहजता और संवेदनशीलता उनकी कविताओं को आम पाठक के लिए भी सुलभ बनाती है और साहित्यिक दृष्टि से भी समृद्ध करती है। जादौन जी का संकलन “एक फ़ितूर” इस रचनात्मक परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह पुस्तक व्यंग्य और कविता का अद्भुत संगम है जहाँ शब्दों में हास्य है, पर भीतर गहरी वेदना भी छिपी है; जहाँ मुस्कुराहट के साथ सोचने की प्रेरणा है। “एक फ़ितूर” समाज के यथार्थ को उजागर करती हुई, पाठक को संवेदना, सत्य और आत्मबोध की यात्रा पर ले जाती है। राजेन्द्र सिंह जादौन की लेखनी में एक पत्रकार की पैनी दृष्टि और एक कवि का कोमल हृदय एक साथ बोलता है। वे शब्दों से केवल दृश्य नहीं बनाते, बल्कि विचार जगाते हैं। उनका हर लेख और कविता समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और मानवीय संवेदना का प्रमाण है। संक्षेप में कहा जाए तो राजेन्द्र सिंह जादौन न केवल शब्दों के साधक हैं, बल्कि संवेदना के संरक्षक भी हैं एक ऐसे लेखक, जो अपनी रचनाओं से समाज को आईना दिखाते हैं और पाठक को भीतर से झकझोर देते हैं। “एक फ़ितूर” उनकी इसी संवेदनशील और सार्थक रचनात्मकता का प्रमाण है, जो हिंदी साहित्य में एक स्थायी छाप छोड़ने वाली कृति के रूप में स्थापित होती है।

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