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Fakeeri Jhole ke Item

Fakeeri Jhole ke Item

Author : Dr. Pradeep Upadhyay

Book Cost

Original price was: ₹239.Current price is: ₹229.

Short Description

“फ़क़ीरी झोले के आइटम” डॉ. प्रदीप उपाध्याय की उसी व्यंग्य परंपरा का नवीन पड़ाव है, जिसमें हास्य की चाशनी में लिपटा हुआ सामाजिक यथार्थ पाठक के सामने इस तरह रखा जाता है कि वह हँसते-हँसते अपने समय की सच्चाइयों से रू-बरू हो सके। यह संग्रह पाठक को केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समकालीन जीवन की विडंबनाओं पर ठहरकर सोचने का निमंत्रण भी देता है।

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Page Count

127

Book Type

Paperback

ISBN

9789364027540

Mrp

239

Genre

politics book

Language

Hindi

About the Book

समय का यह दौर घोषणाओं, प्रतीकों और प्रलोभनों की अजीब राजनीति का दौर है। यहाँ विचारों से अधिक महत्व नारों को मिलता है, और सादगी का मुखौटा ओढ़े हुए सत्ता अक्सर फ़क़ीरी का दावा करती दिखाई देती है। ऐसे समय में व्यंग्य ही वह साहित्यिक विधा है जो मुस्कराहट के भीतर छिपे हुए सच को उजागर करने का साहस रखती है। “फ़क़ीरी झोले के आइटम” समकालीन जीवन की उन्हीं विसंगतियों का दस्तावेज़ है, जिन्हें लेखक ने एक फ़क़ीर की तरह अपने अनुभवों के झोले में संजोया है। इस झोले में राजनीति की रेवड़ियाँ भी हैं, घोषणाओं के पुलिंदे भी, लोकतंत्र के बाज़ार में बिकती नैतिकताओं की खबरें भी और आम आदमी की विडंबनाओं का करुण-हास्य भी। डॉ. प्रदीप उपाध्याय का व्यंग्य केवल हँसाने का उपक्रम नहीं है; वह पाठक के मन में प्रश्नों की हलचल पैदा करता है और यह सोचने को विवश करता है कि आखिर इस तमाशे में असली फ़क़ीर कौन है और असली बाज़ार कहाँ लगा है। लगभग पाँच दशकों से हिंदी साहित्य में सक्रिय डॉ. प्रदीप उपाध्याय समकालीन व्यंग्य लेखन के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। “फ़क़ीरी झोले के आइटम” डॉ. प्रदीप उपाध्याय की उसी व्यंग्य परंपरा का नवीन पड़ाव है, जिसमें हास्य की चाशनी में लिपटा हुआ सामाजिक यथार्थ पाठक के सामने इस तरह रखा जाता है कि वह हँसते-हँसते अपने समय की सच्चाइयों से रू-बरू हो सके। यह संग्रह पाठक को केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समकालीन जीवन की विडंबनाओं पर ठहरकर सोचने का निमंत्रण भी देता है।

About the Author

21 जनवरी, 1957 को झाबुआ मध्यप्रदेश में जन्में डॉ. प्रदीप उपाध्याय तीन विषयों में स्रातकोत्तर के साथ विधि स्रातक हैं। मध्यप्रदेश शासन अन्तर्गत राज्य वित्त सेवा में अतिरिक्त संचालक के पद पर रहते हुए वर्ष 2016 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ग्रहण कर चुके हैं। वर्ष 1975 से लेखन में सक्रिय हैं। देश के प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, लघुकथा, कविताएँ, व्यंग्य आलेख तथा विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक विषयों पर आलेख एवं शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं।

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