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Hareva Na Lungi Piya Se

Hareva Na Lungi Piya Se

Author : Harshit Upreti

Book Cost

399

Short Description

क्या आपको याद है वो बैठकी होलियाँ जो रात भर चलती थीं? या वो खड़ी होली जहाँ पूरा गाँव एक घेरे में नाचता था? आज जब पहाड़ के गाँवों से पलायन और आधुनिकता ने हमारे पारम्परिक गीतों को थोड़ा धीमा कर दिया है, तब 'हरेवा ना लूंगी पिया से' एक मशाल की तरह सामने आती है। इस किताब में हर्षित उप्रेती ने उत्तराखंड की होली के दुर्लभ और सबसे लोकप्रिय गीतों को एक साथ पिरोया है।

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399

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Page Count

161

Book Type

Paperback

ISBN

9789364028318

Mrp

399

Genre

Hindi Poetry

Language

Hindi

About the Book

क्या आपको याद है वो बैठकी होलियाँ जो रात भर चलती थीं? या वो खड़ी होली जहाँ पूरा गाँव एक घेरे में नाचता था? आज जब पहाड़ के गाँवों से पलायन और आधुनिकता ने हमारे पारम्परिक गीतों को थोड़ा धीमा कर दिया है, तब ‘हरेवा ना लूंगी पिया से’ एक मशाल की तरह सामने आती है। इस किताब में हर्षित उप्रेती ने उत्तराखंड की होली के दुर्लभ और सबसे लोकप्रिय गीतों को एक साथ पिरोया है। यह किताब हर उस पहाड़ी के घर में होनी चाहिए जिसे अपनी बोली और अपने संगीत से प्यार है।

About the Author

आज के इस दौर में, जहाँ हम अपनी जड़ों को भूलकर बाहरी चकाचौंध के पीछे भाग रहे हैं, हर्षित उप्रेती एक नई सोच के साथ सामने आए हैं। अक्सर हमारी उम्र के युवाओं को अपनी परंपराओं, लोकगीतों या पहाड़ी संस्कृति की बात करना पुरानापन या पिछड़ापन लगता है, लेकिन हर्षित इस सोच को बदलना चाहते हैं। हर्षित का मानना है कि जो अपनी विरासत का सम्मान नहीं कर सकता, वह अपनी पहचान कभी नहीं बना सकता। हमारे पूर्वजों की यह अनमोल संस्कृति कोई पुरानी कहानी नहीं, बल्कि हमारा गौरव है। हर्षित का यह प्रयास युवाओं के लिए एक पुकार है—कि हम अपनी मिट्टी की खुशबू को खोने न दें, बल्कि उसे अपनी पहचान का सबसे अहम हिस्सा बनाएं।

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