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Main Ghoont Ghoont Jise Peeta Hu

Main Ghoont Ghoont Jise Peeta Hu

Author: Manish Aggrawal ‘Manzar’

Book Cost

Original price was: ₹249.Current price is: ₹229.

Short Description

ये सिर्फ एक शेर नहीं है। ये मेरा शायरी ये प्रति विशेष लगाव है जिस वजह से मैने इसे अपनी किताब के शीर्षक के रूप में चुना है। कई सालों में कोरे पन्नों पर खींची आड़ी तिरछी लकीरों को समेट कर एक किताब के रूप में आपके सामने प्रस्तुत किया है। इस किताब का प्रकाशित होना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा है जिसमें मेरी माता जी और सभी परिवारजनों का विशेष योगदान है जिन्होंने मेरी लिखी हर पंक्ति और हर शेर को सराहा चाहे उसमें भर भर कर गलतियां क्यों न हो। प्रकाशन समूह Benzaiten Publication और निधि जी का विशेष आभार जिन्होंने इस सपने को उड़ान भरने में सहयोग किया।

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Original price was: ₹249.Current price is: ₹229.

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Page Count

122

Book Type

Paperback

ISBN

978-93-6402-802-8

Mrp

249

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

एक धूप चढ़ी है आहिस्ता मेरी यादों के मयखाने में मैं घूँट-घूँट जिसे पीता हूंँ भर भर के पैमाने में ये सिर्फ एक शेर नहीं है। ये मेरा शायरी ये प्रति विशेष लगाव है जिस वजह से मैने इसे अपनी किताब के शीर्षक के रूप में चुना है। कई सालों में कोरे पन्नों पर खींची आड़ी तिरछी लकीरों को समेट कर एक किताब के रूप में आपके सामने प्रस्तुत किया है। इस किताब का प्रकाशित होना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा है जिसमें मेरी माता जी और सभी परिवारजनों का विशेष योगदान है जिन्होंने मेरी लिखी हर पंक्ति और हर शेर को सराहा चाहे उसमें भर भर कर गलतियां क्यों न हो। प्रकाशन समूह Benzaiten Publication और निधि जी का विशेष आभार जिन्होंने इस सपने को उड़ान भरने में सहयोग किया। आज आपके हाथों में मेरी यह किताब है। इसमें आप ‘बारिश’ शीर्षक से शायरी, ‘बहार’ शीर्षक से गीत और ‘बिखरी कलम’ शीर्षक से कुछ कत आत पढ़ेंगे। चूंकि ये मेरी पहली किताब है इसमें काफी त्रुटियां, बहर – बेबहर शायरी और कुछ कच्चे पक्के गीत मिलेंगे। गलतियों को नज़र अंदाज़ कर इस बारिश में भीगने का आनंद लें। आपके मन पर उतरी इस किताब की एक ठंडी बूंद से भी मै स्वयं को सफल समझूंगा। आपका मनीष (मंज़र)

About the Author

मैं मनीष अग्रवाल (उपनाम मंज़र) बिहार राज्य के आरा शहर का निवासी हूँ जो राजधानी पटना से 50 km पश्चिम में स्थित है। मैंने BHU Varanasi से B.com किया है। वर्तमान में मैं अपने स्व. पिताजी की विरासत ‘गोयल हैन्डलूम’ के नाम से कपड़ों का प्रतिष्ठान संभालता हूँ। लेखन में रुचि बचपन से थी। विद्यालय की वार्षिक पत्रिका में मेरे लेख, कविताएँ और लघु कहानियाँ प्रमुखता से छपते थे। परन्तु पढ़ाई और उसके बाद समयाभाव के कारण लेखन छूट गया। लॉकडाउन मेरे जीवन में – आपदा में अवसर का प्रत्यक्ष उदाहरण है। घर पर खाली बैठे-बैठे पुरानी अलमारी में धूल-धूसरित अपनी भूली प्रतिभा के दर्शन हुए। बशीर बद्र, राहत इंदौरी, साहिर साहब, गुलज़ार, परवीन शाकिर सहित कई फ़नकारों को पढ़ा और समझा। इसके बाद पारिवारिक प्रोत्साहन मिलने पर इंटरनेट पर कई लेखन मंचों पर लिखना शुरू किया। मंचों तथा इनसे जुड़े कई लेखकों के उत्साहवर्धन से मेरी कलम में और निखार आया। कई प्रतियोगिता मंचों पर अपनी रचनाएँ भेजीं और प्रोत्साहन पाया। अब अपने उन सारे कच्चे-पक्के मोतियों को एक धागे में पिरोने के उद्देश्य से इस किताब का संकल्प लिया है। अपना प्यार दीजिए।

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