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Parmatma Tumhare Saath Hain, Pehchano

Author: Laxmi Sen ‘Jugni’

Book Cost

Original price was: ₹199.Current price is: ₹185.

इस पुस्तक के माध्यम से पाठको को यह बताया जा रहा हैं की हम किस प्रकार परमात्मा को खोज सकते हैं परमात्मा कहां रहता हैं हमारे पूरे जीवन में वह हमे मिलेगा या नहीं और मिलेगा तो कब मिलेगा।

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Original price was: ₹199.Current price is: ₹185.

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Page Count

79

Book Type

Paperback

ISBN

9788197242465

Mrp

199

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

इस पुस्तक के माध्यम से पाठको को यह बताया जा रहा हैं की हम किस प्रकार परमात्मा को खोज सकते हैं परमात्मा कहां रहता हैं हमारे पूरे जीवन में वह हमे मिलेगा या नहीं और मिलेगा तो कब मिलेगा। हमे उन्हे पाने के लिए उन्हें पहचानना होगा और उनकी पहचान क्या हैं और वे हमारे साथ ही हैं, परंतु वह कोन हैं, कहा हैं, किस रूप में हैं। इन सब प्रश्नों के उत्तर इस पुस्तक के माध्यम से देने का प्रयास किया गया हैं। इस पुस्तक में आपको आध्यात्मिक विचार देखने को मिलेंगे जिन्हे पढ़ कर आपकी आध्यात्मिक दृष्टि और प्रखर होगी। इस पुस्तक के द्वारा आपका आध्यात्मिक नजरिया और निखरेगा। आपको इस पुस्तक के अंत होने तक आपके सारे प्रश्नों के जवाब मिल जायेंगे और आपको दिव्य अनुभूति का अहसास होगा। आप इस पुस्तक को एक बार अवश्य पढ़िए और अपने परिवारजनों और मित्रो के साथ भी साझा कीजिए।

About the Author

मेरा नाम लक्ष्मी सेन हैं, मेरी पूरी शिक्षा मेरे गृह जिले बूंदी राजस्थान से ही हुई। मेने बीए बीएड – यूनिवर्सिटी ऑफ कोटा से तथा एम ए अंग्रेजी साहित्य वर्धमान ओपन यूनिवर्सिटी कोटा से की हैं। मेरी शिक्षा में मेरा मुख्य विषय हमेशा ही अंग्रेजी साहित्य रहा हैं, परंतु मेरा माध्यम हिन्दी हैं। यह मेरी प्रथम पुस्तक है जो मेने 23 वर्ष की उम्र में लिखी हैं। बचपन से ही मुझे चित्रकला का और लिखने का बहुत शौक था मेने चित्र तो अनेकों बनाए पर कभी लेखन कार्य को गति नही दे पाई। मैं हमेशा से चाहती थी कि मैं बड़ी होकर एक लेखिका के रूप में अपनी पहचान बनाऊं । अपने विचारों को दुनिया के सामने प्रकट करूं और इसका सर्वश्रेष्ठ माध्यम मुझे पुस्तक लिखना लगा। मैं हमेशा अपने विचारों को खाली पन्नों में लिख कर रखती थी परंतु मार्गदर्शन के अभाव होने के कारण में उन्हें पुस्तक का रूप ना दे पाई और अब मार्गदर्शन मिलने पर उन्हें पुस्तक का रूप दे रही हूं मैं मेरी प्रथम पुस्तक आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूं भविष्य में ओर भी श्रेष्ठ पुस्तक आप सभी के लिए लाने को प्रयासरत रहूंगी। आशा करती हूं कि आपको यह पुस्तक पसंद आएगी।
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