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Puran, Prakriti aur Prerna

Puran, Prakriti aur Prerna

Author: Anjana Rawat

Book Cost

Original price was: ₹249.Current price is: ₹195.

Short Description

'पुराण प्रेरणा और प्रकृति' के पन्नों से गुज़रते हुए आप परंपरा, अंतर्दृष्टि और नैसर्गिक सौंदर्य के अनुपम संगम से साक्ष्य होंगे। ये कविताएँ केवल शब्द नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ और प्रकृति के साथ मनुष्य के अटूट संबंध का जीवंत प्रतिबिंब हैं।

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Original price was: ₹249.Current price is: ₹195.

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Page Count

108

Book Type

Paperback

ISBN

978-93-6402-194-4

Mrp

249

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

‘पुराण प्रेरणा और प्रकृति’ के पन्नों से गुज़रते हुए आप परंपरा, अंतर्दृष्टि और नैसर्गिक सौंदर्य के अनुपम संगम से साक्ष्य होंगे। ये कविताएँ केवल शब्द नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ और प्रकृति के साथ मनुष्य के अटूट संबंध का जीवंत प्रतिबिंब हैं। यह काव्य-संग्रह तीन धाराओं में प्रवाहित है: पुराण, प्रेरणा और प्रकृति, और हर धारा अपनी विशिष्टता के साथ कवि की बहुआयामी प्रतिभा को दर्शाती है। पौराणिक कथाओं और चरित्रों से प्रेरणा लेते हुए कविताओं में सनातन मूल्यों और शाश्वत सत्यों को नए परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया है। ये कविताएँ हमें बताती हैं कि कैसे हमारे मिथक और गाथाएँ आज भी हमारे जीवन और समाज को आकार दे रही हैं, और कैसे उनमें छिपे संदेश वर्तमान चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं। संग्रह का तीसरा महत्वपूर्ण पहलू है प्रकृति। जिस तरह जीवन में धरती, चाँद-तारे, पेड़-पौधे और जीव-जंतु अभिन्न हैं, उसी तरह इन कविताओं में भी प्रकृति की विराट और निर्णायक भूमिका दिखाई देती है। ये कविताएँ हमें याद दिलाती हैं कि सृष्टि के प्राकृतिक अनुशासन के भीतर ही मनुष्य की तमाम चेष्टाएँ अपना स्थान ग्रहण करती हैं, और उसी के अनुकूलन में मनुष्य अपना स्वाभाविक विकास कर पाता है। शहरीकरण के आक्रामक प्रभावों और प्रकृति से बढ़ती दूरी के खतरों को भी रेखांकित किया गया है, जो हमें अपने मूल से जुड़े रहने की महत्ता बताते हैं। ‘पुराण प्रेरणा और प्रकृति’ का पाठ करना कविता-सुधी पाठकों के लिए निश्चय ही एक समृद्ध और गहन अनुभव होगा, जो उन्हें परंपरा की जड़ों से जोड़ेगा, भीतर की प्रेरणा को जगाएगा और प्रकृति के साथ उनके संबंध को नए सिरे से परिभाषित करेगा।

About the Author

अंजना जी एक ने इस पुस्तक में प्रकृति, प्रेरणा और पुराणों को अपनी कविताओं का आधार बनाया है। वह संवेदनशील और दूरदर्शी कवयित्री हैं जो अपनी कविताओं के माध्यम से साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने का बीड़ा उठा चुकी हैं। उनका मानना है कि साहित्य केवल विशिष्ट वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो जीवन के सौंदर्य, गूढ़ रहस्यों और मानवीय भावनाओं को समझना चाहता है। वे पर्यावरण असंतुलन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसे विषयों पर भी अपनी कविताओं के माध्यम से चिंता व्यक्त करती हैं।वे मानती हैं कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और उसे समाज को सही दिशा दिखाने का काम करना चाहिए। इसी उद्देश्य से वे अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को शिक्षित और जागरूक करने का प्रयास करती हैं। उनका लेखन उनके विचारों और उनके आदर्शों का प्रतिबिंब है, जो पाठकों को सोचने, समझने और प्रेरित होने के लिए बाध्य करता है।

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