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Pyare Baccho

Pyare Baccho

Author : Anjana Rawat

Book Cost

Original price was: ₹239.Current price is: ₹229.

Short Description

आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, भावनात्मक सुदृढ़ता और आत्मविश्वास विकसित करना भी है। प्रस्तुत लघुकथा संग्रह बच्चों को परीक्षा के भय, अकादमिक दबाव और असफलता की आशंका से उबरने का मार्ग दिखाता है तथा उन्हें जीवन के वास्तविक मूल्यों से परिचित कराता है।

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Original price was: ₹239.Current price is: ₹229.

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Page Count

116

Book Type

Paperback

ISBN

9789364022385

Mrp

239

Genre

Children's book

Language

Hindi

About the Book

आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, भावनात्मक सुदृढ़ता और आत्मविश्वास विकसित करना भी है। प्रस्तुत लघुकथा संग्रह बच्चों को परीक्षा के भय, अकादमिक दबाव और असफलता की आशंका से उबरने का मार्ग दिखाता है तथा उन्हें जीवन के वास्तविक मूल्यों से परिचित कराता है। पुस्तक में संवेदनशीलता, करुणा, सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, कृतज्ञता और धैर्य जैसे महत्वपूर्ण जीवनमूल्यों को सरल एवं प्रेरक कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह बच्चों को दूसरों से तुलना करने के बजाय स्वयं को बेहतर बनाने, गलतियों से सीखने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित करती है। साथ ही, एकाग्रता, प्राणायाम, पर्याप्त नींद और समय प्रबंधन जैसे व्यावहारिक उपाय विद्यार्थियों को मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायता करते हैं। यह पुस्तक माता-पिता और शिक्षकों को भी बच्चों के लिए सहयोगपूर्ण एवं तनावमुक्त वातावरण बनाने का संदेश देती है। इसका उद्देश्य बच्चों को यह समझाना है कि अंक ही सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हैं, बल्कि निरंतर प्रयास, सीखने की ललक और सकारात्मक दृष्टिकोण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। आशा है कि ये कहानियाँ बालमन में शांति, आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और उज्ज्वल चरित्र के ऐसे बीज बोएँगी, जो जीवनभर उनका मार्गदर्शन करते रहेंगे।

About the Author

अंजना रावत हिंदी साहित्य की एक संवेदनशील, विचारशील और समाज-उन्मुख लेखिका हैं, जिनका लेखन केवल सौंदर्य और भावनाओं की अभिव्यक्ति तक सीमित न रहकर सामाजिक चेतना जागृत करने का एक जीवंत माध्यम है। यह पुस्तक शिक्षिका एवं लेखक अंजना रावत जी की एक अत्यंत प्रेरणादायक और विचारशील कृति है। अंजना रावत जी लंबे समय से बाल शिक्षा, बाल मनोविज्ञान और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। छात्र जीवन की व्यावहारिक समस्याओं, परीक्षा के तनाव और आज के डिजिटल युग में बच्चों के भटकते ध्यान को उन्होंने बहुत करीब से समझा है। साहित्य को समाज का दर्पण मानने वाली अंजना जी का दृढ़ विश्वास है कि रचनाधर्मिता का मुख्य उद्देश्य जनसामान्य को जागरूक करना और समाज को सही दिशा दिखाना है। पर्यावरण असंतुलन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसे गंभीर विषयों पर उनकी दृष्टि विशेष रूप से केंद्रित रही है; वे अपनी कविताओं के माध्यम से यह स्मरण कराती हैं कि मनुष्य प्रकृति का ही एक अभिन्न अंग है और उसके संरक्षण के लिए आगे आना हमारा नैतिक दायित्व है। अब तक तीन सफल काव्य-संग्रहों की रचना कर चुकीं अंजना जी का लेखन पाठकों को एक जिम्मेदार नागरिक बनने तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देता है। अपनी इसी साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, उन्होंने अपनी चौथी कृति के रूप में बाल-मन और बाल-मनोविज्ञान को समर्पित एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुस्तक की रचना की है। बच्चों को शिक्षा देने के अपने गहन अनुभव के दौरान, उनकी मन:स्थिति और परीक्षा के तनाव को निकटता से भांपकर अंजना जी ने इस पुस्तक का सृजन किया है। बाल्यावस्था की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिखी गई यह पुस्तक बच्चों को परीक्षा के भय से मुक्त कर उनमें मानसिक सहजता लाने का प्रयास करती है। अत्यंत सहज, सरल और सटीक भाषा में रचित यह कृति प्राचीन संस्कृत श्लोकों और रोचक लघु कथाओं के माध्यम से बाल-मन को सजग, सुदृढ़ और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की एक अभूतपूर्व व सराहनीय कोशिश है। अंजना रावत का यह समग्र लेखन उनके उच्च आदर्शों, दूरदर्शी सोच और सामाजिक सरोकारों का अनुपम प्रतिबिंब है।

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