“पाठकगण! मेरे हाथों में ‘सागर के मोती’ नामक इस काव्य-संग्रह को रखते हुए, एक गर्व और एक गहन संतुष्टि का अनुभव हो रहा है। यह संग्रह लेखक (मेरे दादा) के जीवन के विविध अनुभवों, भावनाओं और चिंतनों का एक प्रतिबिम्ब है, जिसे उन्होंने शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। ‘सागर’ नाम से ही एक विशालता का अहसास होता है, और यही विशालता इस संग्रह की कविताओं में भी झलकती है।
यहाँ गुरु-भक्ति की गंभीरता से लेकर माँ के प्रति अगाध प्रेम की कोमलता तक, कई भावनाएँ एक साथ समाहित हैं। ‘गुरुदेव को श्रद्धांजलि’, ‘माँ को समर्पण’, ‘माँ और बचपन’ जैसी कविताएँ स्मृतियों के उस गहरे सागर में ले जाती हैं जहाँ बचपन की मासूमियत और प्रेम की पवित्रता निवास करती है। दूसरी ओर, ‘किराए के मकान और खेतों की मचानें’, ‘समाज की बेरुखी’, ‘बेबसी और यादें’ जैसी कविताएँ उनके समकालीन जीवन की चुनौतियों और पीड़ाओं को बड़ी ही मार्मिकता से चित्रित करती हैं। ‘वक्त और मोहब्बत’, ‘प्रेम की पाती’, ‘अधूरा प्यार’ – ये शीर्षक प्रेम के विभिन्न आयामों की ओर इशारा करते हैं, प्रेम की पूर्णता और अधूरेपन के बीच के संघर्ष को दर्शाते हैं।
‘यादों का सावन’, ‘अनन्त ब्रह्मांड’, ‘ब्रह्मांड की अदृश्य सत्ता’, ‘अद्भुत हुस्न’ जैसी कविताएँ उनके आंतरिक जगत की गहराई को उजागर करती हैं, जहाँ प्रकृति की सुंदरता और आध्यात्मिकता का संगम है। ‘नौनिहालों के लिए संदेश’ एक आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, भविष्य की पीढ़ी के प्रति उनके शुभकामनाओं और आशीर्वादों को व्यक्त करता है। ‘दिल की बातें’ लेखक के मन के सबसे निजी कोनों को खोलता है, जहाँ भावनाओं का एक सच्चा और ईमानदार चित्रण है।
मुझे आशा है कि यह संग्रह पाठकों के हृदय को छू पाएगा और उन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगा। यह हमारा प्रयास है, समकालीन हिंदी कविता में एक छोटी सी धारा जोड़ने का। और अंत में, मैं पुस्तक के पाठकों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, उनके प्यार और समर्थन के लिए, जिसने इस यात्रा को पूरा करने में मदद की।
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