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Sargoshiyan

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By – Devraj Pradeep Verma

सरगोशियां उन ख्यालों, ख्वाबों, सवालों और हिसाबों का पुलिंदा है जिसके बारे में हम खुलकर चर्चा नहीं कर पाते हैं, सिवाए इसके कि हम अपने कुछ अजीज़ या ख़ुद से ही इन चीजों के बारे में बात करके रह जाते हैं । ख्वाहिशें और नफरत हमारे द्वारा जोर देकर न बोलने की वजह से हमें अंदर ही अंदर खोखला कर देती हैं। यह किताब जहां सपनों का जहां सजाती है तो समाज की सच्चाई भी बयान करती है, मोहब्बत के नग्मे पढ़ाती है तो उसे निभाने का सलीका भी सिखाती है। पुरानी यादों को कुरेदती है तो आने वाले वक़्त के लिए राह भी दिखाती है । किताब में लिखे गए शब्द जितने पढ़ने में अच्छे लगते हैं उससे भी ज्यादा उनके मतलब को जानने में आनंद मिलता है । यह मात्र तुकबंदी नहीं बल्कि सुर में लहराती हुई बोली की मिठास है ।

Description

देवराज प्रदीप वर्मा मूलतः प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से ताल्लुक़ रखते हैं । टी सीरीज के GKFTII इंस्टीटयूट से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा कर चुके देवराज प्रदीप पेशे से एक कंटेंट राइटर और ट्रांसलेटर हैं । हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में वह कंटेंट को लिखते और ट्रांसलेट करते हैं ।

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