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Sita ka vidroh

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Author: Chitrawati Patel ‘Didi’

‘सीता का विद्रोह’ जैसा कि नाम से प्रतीत हो रहा है कि यह किताब सीता के चरित्र को प्रतीक मानकर महिलाओं पर हो रहे हिंसा, अन्याय और दुर्भावनाओं के प्रति विद्रोह का दर्पण है। इस किताब में समाज में महिलाओ के प्रति व्याप्त बुराइयों और तुष्टिकरण का प्रतिघात किया गया है।

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Description

About the Author:

चित्रावती पटेल “दीदी” मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की गुनौर तहसील के समीप गांव गभौरा में जन्मी। लेखिका ग्रामीण अंचल में पली, बढ़ी और पढ़ी, सुबह के सपनों की तरह ही जिंदगी में सब होता चला गया। स्नातक की पढ़ाई के पश्चात परिवार वालों ने पूणे से एमसीए करने वाले राजबहादुर पटेल के साथ वैवाहिक बंधन में बांध दिया। जीवन के उतार चढ़ाव के बीच पढाई के साथ साथ कविताएं लिखने लगीं या कहें कि कम उम्र में ही समाज में महिलाओं पर हो रहे अन्याय को समझने परखने लगीं और इसी का नतीजा है यह लेखिका की पहली पुस्तक “सीता का विद्रोह” नामक काव्य संग्रह। वर्तमान में लेखिका चित्रावती पटेल “दीदी” पन्ना स्थित एलिक्सिर पब्लिक स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।

About the Book:

‘सीता का विद्रोह’ जैसा कि नाम से प्रतीत हो रहा है कि यह किताब सीता के चरित्र को प्रतीक मानकर महिलाओं पर हो रहे हिंसा, अन्याय और दुर्भावनाओं के प्रति विद्रोह का दर्पण है। इस किताब में समाज में महिलाओ के प्रति व्याप्त बुराइयों और तुष्टिकरण का प्रतिघात किया गया है। किताब में बड़ी ही खूबसूरती से महिलाओं के चरित्र और भावनाओ को रोचक और रसपूर्ण शब्दों से उकेरा गया है। महिला चाहे शहरी हो या ग्रामीण उसे कुछ निश्चित प्रथाओं तथा रीतियों से गुज़रना पड़ता है, जो कभी-कभी महिलाओं के लिए असहाय और अनुचित होती हैं। यह किताब उन्ही समस्याओ का दर्पण है जो समाज को प्रतिबिम्ब दिखाती है। यह किताब जहाँ महिलाओं की भावनाओ को हमसे परिचय कराती हैं वहीं हमें समाज की कड़वी सच्चाई को बयां करती हैं। महिलाओं के संकोच, डर, अपमान, ख़ुशी आदि को किताब में बड़ी ही शालीनता और कलात्मक तरीके से उकेरा गया है।

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