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Trinpushpon Ke Sanchay

Trinpushpon Ke Sanchay

Author: Ravindra Sonwane ‘Rajkan’

Book Cost

Original price was: ₹299.Current price is: ₹269.

Short Description

तृणपुष्पों के संचय डॉ. रवींद्र सोनवणे ‘रजकण’ का एक संवेदनशील काव्य-संग्रह है जिसमें प्रकृति, प्रेम, राष्ट्रभावना, वेदना, नारी विमर्श और अध्यात्म के विविध आयाम एक साथ गुँथे हैं।

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Original price was: ₹299.Current price is: ₹269.

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Page Count

207

Book Type

Paperback

ISBN

978-93-6402-291-0

Mrp

299

Genre

Poetry

Language

HIndi

About the Book

तृणपुष्पों के संचय डॉ. रवींद्र सोनवणे ‘रजकण’ का एक संवेदनशील काव्य-संग्रह है जिसमें प्रकृति, प्रेम, राष्ट्रभावना, वेदना, नारी विमर्श और अध्यात्म के विविध आयाम एक साथ गुँथे हैं। कवि ने संस्कृतनिष्ठ भाषा और छायावादी शैली में जीवन, मानवता और सृष्टि के गूढ़ संबंधों को व्यक्त किया है। इस संग्रह की कविताएँ भावनाओं की गहराई और चिंतन की गंभीरता से पाठक के हृदय को स्पर्श करती हैं। ‘तृण’ और ‘पुष्प’ जैसे प्रतीकों के माध्यम से कवि ने सूक्ष्म से सूक्ष्म अनुभवों को सौंदर्य और करुणा के साथ अभिव्यक्त किया है—यह कृति जीवन और काव्य दोनों का संगम है।

About the Author

नाम- प्रो. रवींद्र सोनवाने ‘रजकण’ पिता – स्व. श्री जनक लाल सोनवाने (शिक्षक) माता – स्व. श्रीमती लक्ष्मी सोनवाने ( शिक्षिका) निवास- बालाघाट ( मध्य प्रदेश) शिक्षा – एम. एससी.(गणित); पी.एचडी.(गणित); डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर ( मध्य प्रदेश). प्रकाशन- गणित विषय में विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में शोध पत्रों का प्रकाशन एवं विभिन्न पत्रिकाओं में गणितीय आलेख। सेवा- मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग में 40 वर्षों की सेवा के पश्चात जून 2020 में शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी महाविद्यालय बालाघाट से प्राध्यापक (गणित )पद से सेवानिवृत। सेवा काल में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन। साहित्यिक गतिविधियां- स्कूली शिक्षा के समय से ही काव्य लेखन। पत्र पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। प्रकाशित काव्य संग्रह– १. “रजकण माटी के . २. वन फूलों के प्रतिबिंब. ३. साझा रचना संग्रह” हवा में गूंजते स्वर” और “सपनों की झिलमिल” में भागीदारी।४. अनेक रचनाओं का साहित्यिक ग्रुपस् के द्वारा श्रेष्ठ रचनाओं हेतु चयन।५. यह रचना संग्रह”तृण पुष्पों के संचय। संप्रति- सेवानिवृत्त काल में समसामयिक ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं समाज सशक्तिकरण पर चिंतन लेखन एवं कार्य।

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