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Vande Bharti

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By Shabdanchal
“मन की शोभा, हृदय का श्रृंगार वंदे भारती, रोम-रोम करे वीरों का पुकार वंदे भारती।“ “देशभक्ति” मात्र एक शब्द नहीं है ।यह एक ऐसी स्थायी भावना है जो हर सच्चे भारतीय के मन में निवास करती है, वो संसार के किसी भी कोने में क्यों ना रहे।

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Description

“मन की शोभा, हृदय का श्रृंगार वंदे भारती, रोम-रोम करे वीरों का पुकार वंदे भारती। “ “देशभक्ति” मात्र एक शब्द नहीं है यह एक ऐसी स्थायी भावना है जो हर सच्चे भारतीय के मन में निवास करती है, वो संसार के किसी भी कोने में क्यों ना रहे ।यह वही भावना है जो किसी क्रांतिकारी की कहानी, किसी सैनिक की शहादत या फिर किसी देशभक्ति के गीत को सुनने मात्र से हमारी आँखों में आँसू ले आती है व हमें देशप्रेम के एक अथाह सागर में बह जाने को विवश कर देती है। यही भावना जब अपनी चरम सीमा को पार कर जाती है तो जन्म देती है ऐसे महान देशभक्तों को जो देशहित में ऐसे-ऐसे कार्य कर जाते हैं कि जिनका ऋण हम साधारण देशवासी कई जन्म लेकर भी नहीं उतार सकते।


शब्दांचल पिछले कई वर्षों से हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए अनेकों प्रयास करता आ रहा है और प्रयासरत है, उसके प्रशंसकों और लेखकों का उसकी मुहिमों में सदैव ही पूर्ण सहयोग रहा है जिससे शब्दांचल निरंतर अपना विकास कर पा रहा है और समय-समय पर लेखकों के लिए अलग-अलग गतिविधियों का आयोजन करता रहता है।

Additional information

Weight 0.15 kg
Dimensions 20 × 10 × 1 cm

Product Details

ISBN:
Size: 5×8
Format: Paperback
Pages:
Language: Hindi
Genre: Patriotic | Poetry
Mrp: 249/- INR

1 review for Vande Bharti

  1. Aditya Yadav

    देश प्रेम की भावना का बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण।

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