Cart is empty

ye sham kab dhalegi

ye sham kab dhalegi

Book Cost

Original price was: ₹299.Current price is: ₹289.

Short Description

ये शाम कब ढलेगी? कुछ शामें सिर्फ़ दिन के ढलने का इंतज़ार नहीं होतीं… वे अपने भीतर एक पूरी ज़िंदगी समेटे होती हैं। ‘ये शाम कब ढलेगी?’ डॉ. बासदुवे राजभर की संवेदनशील कविताओं का ऐसा संग्रह है, जहाँ मोहब्बत, इंतज़ार, बिछड़ना, तन्हाई, यादें और ज़िंदगी के अनगिनत सवाल एक-दूसरे से संवाद करते हैं।

Share this Book

WhatsApp
Facebook
Twitter

Original price was: ₹299.Current price is: ₹289.

Quality Products

7 Days Return Policy

Usually Ships in 2 Days

Apply Coupon at Checkout

Page Count

55

Book Type

Paperback

ISBN

978-9364021128

Mrp

282

Genre

Poetry

Language

Hindi

About the Book

ये शाम कब ढलेगी? कुछ शामें सिर्फ़ दिन के ढलने का इंतज़ार नहीं होतीं… वे अपने भीतर एक पूरी ज़िंदगी समेटे होती हैं। ‘ये शाम कब ढलेगी?’ डॉ. बासदुवे राजभर की संवेदनशील कविताओं का ऐसा संग्रह है, जहाँ मोहब्बत, इंतज़ार, बिछड़ना, तन्हाई, यादें और ज़िंदगी के अनगिनत सवाल एक-दूसरे से संवाद करते हैं। कभी कोई तस्वीर पुराने रिश्ते की याद बनकर लौटती है, कभी कोई ख़ामोशी भीतर के शोर को आवाज़ देती है, और कभी इंसान खुद को ही बीते हुए वक़्त में तलाशने लगता है। इन कविताओं में प्रेम की मिठास भी है और अधूरेपन की टीस भी; रिश्तों की गर्माहट भी है और अकेलेपन की ठंडी रातें भी। लेकिन इन सबके बीच एक उम्मीद लगातार ज़िंदा रहती है—कि हर लंबी शाम के बाद एक सवेरा ज़रूर आता है। यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि उन भावनाओं का आईना है जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, पर शब्द नहीं दे पाते। अगर आपने कभी किसी का इंतज़ार किया है, किसी को खोया है, किसी रिश्ते को दिल से जिया है या भीड़ के बीच खुद को अकेला पाया है—तो शायद इन पन्नों में आपको अपना कोई अधूरा किस्सा मिल जाए। आइए, इस शाम के सफ़र पर साथ चलें… शायद कहीं आगे एक सवेरा हमारा इंतज़ार कर रहा हो।

About the Author

Recommended Books

Explore our bestselling catalog, featuring a wide array of novels, poetry, and more—each piece a journey through compelling stories and evocative words.

Shopping Basket