पाठकों के दृष्टिकोण से मेरा का परिचय केवल मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तकें हैं। कई अप्रकाशित कविताओं के पश्चात मैंने अपने पहले उपन्यास ‘अनाम: तुम याद आते हो’ (Self Publish on Amazon Kindle) को जून 2020 में अंतिम आकार दिया। जिसमें प्रेम की वास्तविक परिभाषा को, जो अश्लीलता की परछाई से भी अछूती है, से पाठकों को परिचित करवाने का प्रयास किया गया है।
अनाम के बाद ‘सूर्मि’ मेरा का दूसरा उपन्यास है जो क्राइम, सस्पेंस, थ्रीलर विधा में लिखा गया है।
लेखक मध्यप्रदेश के गुना जिले के कुम्भराज शहर के निवासी हैं और पेशे से वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत हैं तथा पिछले कई वर्षों से शासकीय सेवक के तौर पर स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
लेखक के पिता श्री हरिप्रसाद जी शिक्षक हैं और साहित्य प्रेमी भी। पिताजी के साहित्य संग्रह को पढ़ते हुए ही मेरे अंदर साहित्य लेखन की कला का सृजन हुआ और मैंने ने 14 वर्ष की उम्र में ही उपन्यास लिखने का निश्चय कर लिया।
अपनी उच्च शिक्षा के दौरान मुझे और भी कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लेखकों को पढ़ने का सौभाग्य मिला जिससे मेरे अंदर साहित्य लेखन की भावना और अधिक बलवती हुई। मेरे के ऊपर सर्वाधिक प्रभाव श्रीरामचरितमानस का पड़ा और मैं मानस को ही अपने जीवन का पथ प्रदर्शक मानता हूँ।
लेखन के अतिरिक्त मुझे रियल लाइफ फोटोग्राफी करने, हारमोनियम बजाने, स्केचिंग करने और अन्य कई रचनात्मक कार्य करने के भी शोक हैं।
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