“त्याग भी प्रेम है”” मात्र एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि एक ऐसा उपन्यास है जो हृदय की गहराइयों से उपजी भावनाओं का दस्तावेज़ है। इसमें मैने अपने जीवन के अनुभवों को कल्पना के रंगों से सजाकर प्रस्तुत किया है। “”त्याग भी प्रेम है” में केवल प्रेम का मधुर पक्ष ही नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़ा संघर्ष, पीड़ा, समाज और परिवार का दबाव भी चित्रित किया है।
मेरा नाम सुनील कुमार है। मेरा जन्म 22 दिसंबर 1999 को हरियाणा राज्य के रेवाड़ी शहर के एक छोटे से गांव प्राणपुरा उर्फ गोपालपुरा में हुआ। मैं एक साधारण परिवार से संबंध रखता हूँ, जहाँ संस्कार और सादगी को बहुत महत्व दिया जाता हैं बचपन से ही मेरी रुचि पढ़ाई में रही है। मैं हमेशा कुछ नया सीखने की कोशिश करता हूँ और ज्ञान प्राप्त करना मेरे जीवन का अहम हिस्सा है। शिक्षा के साथ-साथ मैं जीवन के अनुभवों को भी बहुत महत्व देता हूँ।
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